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राजस्थान सामान्य ज्ञान : लोक नृत्य

लोक नृत्य गैर केवल पुरुषों द्वारा किया जाने वाला नृत्य। गैर का मूल शब्द ‘घेर’ है जो घेरे से सम्बन्धित है। मेवाड़ और बाड़मेर क्षेत्र में पुरूष लकड़ी की छड़ियां लेकर गोल घेरे में नृत्य करते हैं यही नृत्य गैर नृत्य के नाम से प्रसिद्ध है। इसे गैर घालना, गैर रमना, गैर खेलना तथा गैर […]

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : लोक देवी-देवता

लोक देवी-देवता लोक देवियाँ – करणी माता –बीकानेर के राठौड़ शासकों की कुलदेवी। ‘चूहों वाली देवी’ के नाम से विख्यात। जन्म सुआप गाँव के चारण परिवार में। मंदिर : देशनोक (बीकानेर)। करणीजी के काबे : इनके मंदिर के चूहे। यहाँ सफेद चूहे के दर्शन करणजी के दर्शन माने जाते हैं। –  राव जोधा के समय मेहरानगढ़ दुर्ग की

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : रीति-रिवाज व प्रथाएँ

रीति-रिवाज व प्रथाएँ – भारत के अन्य प्रदेशों से आकर यहां बसने वाले लोगों के अतिरिक्त यहां की सभी जातियों के रीति-रिवाज मूलतः वैदिक परम्पराओं से संचालित होते आये हैं। – यहां तक कि मुसलमानों तथा भील, मीणा, डामोर, गरासिया, सांसी इत्यादि आदिम जातियां भी हिन्दुओं के रूढ़िगत रीति-रिवाजों से अप्रभावित नहीं हैं। – राजस्थान के हर

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : राजस्थानी हस्तकला

राजस्थानी हस्तकला हाथों द्वारा कलात्मक एवं आकर्षक वस्तुओं को बनाना ही हस्तशिल्प (हस्तकला) कहलाता है। राजस्थान में निर्मित हस्तकला की वस्तुएँ न केवल भारत में प्रसिद्धि पा रही है बल्कि विदेशों में भी इन वस्तुओं ने अलग अमिट छाप छोड़ी है। आज भी राजस्थान अपनी हस्तकला के लिए सम्पूर्ण देश में ‘हस्तशिल्पों के आगार’ के

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : राजस्थानी साहित्य एवं संस्कृति

राजस्थानी साहित्य एवं संस्कृति     साहित्य में प्रथम- राजस्थानी की प्राचीनतम रचना भरतेश्वर बाहुबलिघोर (लेखक वज्रसेन सूरि 1168 ई. के लगभग)। भाषा मारू गुर्जर विवरण – भरत और बाहुबलि के बीच हुए युद्ध का वर्णन है। संवतोल्लेख वाली प्रथम राजस्थानी रचना भरत बाहुबलि रास (1184 ई.) में शालिभद्र सूरि द्वारा रचित ग्रंथ भारू गुर्जर भाषा में रचित रास परम्परा

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : राजस्थानी बोलियां और उनके क्षेत्र

राजस्थानी बोलियां और उनके क्षेत्र   भारत के सबसे बड़े प्रांत राजस्थान के निवासियों की मातृभाषा राजस्थानी है। भाषा विज्ञान के अनुसार राजस्थानी भारोपीय भाषा परिवार के अन्तर्गत आती है। राजस्थानी भाषा के उद्भव एवं विकास का गौरवमय इतिहास है। राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति शौरसेनी के गुर्जर अपभ्रंश से मानी जाती है। कुछ विद्वान इसे

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : राजस्थान की जनजातियाँ

राज्य की जनजातियाँ – आदिवासी या जनजाति – ये लोग सभ्यता के प्रभाव से वंचित रहकर अपने प्राकृतिक वातावरण के अनुसार जीवन यापन करते हुए अपनी भाषा, संस्कृति, रहन-सहन आदि को संरक्षित किए हुए हैं। – राजस्थान भारत के 6 जनजाति बहुल राज्यों में से एक हैं। राजस्थान का समूचा दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र एवं दक्षिणी पूर्वी

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : पर्यटन एवं पर्यटन स्थल

पर्यटन पर्यटन की दृष्टि से राजस्थान न सिर्फ भारत, अपितु विश्व के पर्यटन मानचित्र पर अपना विशिष्ट स्थान रखता है। यहां देशी-विदेशी पर्यटकों हेतु अनेक आकर्षण के केन्द्र हैं। राज्य में पर्यटन के विशेष आकर्षण के केन्द्र शाही रेलगाड़ी जैसे पैलेस ऑन व्हील्स एवं रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स, किले, महल एवं हवेलियां, मेले एवं त्यौहार,

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : दुर्ग, महल, बावड़ियाँ, देवल एवं छतरियाँ

दुर्ग, महल, बावड़ियाँ, देवल एवं छतरियाँ किले दुर्ग – दुः+ग (जहाँ गमन करना दुर्गम हो।) मनुस्मृति में सर्वप्रथम दुर्गोंका वर्गीकरण उपलब्ध होता है। कौटिल्य व मनु नेगिरी दुर्ग को सर्वश्रेष्ठ बताया है। राजस्थान के दुर्ग़ों को प्रमुखतः निम्न प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है- गिरि दुर्ग -वह दुर्ग जो किसी उच्च गिरि या पर्वत पर अवस्थित

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राजस्थान सामान्य ज्ञान : त्योहार व मेले

प्रमुख मेले एवं त्यौहार राजस्थान के प्रमुख मेले (हिन्दू माह अनुसार) चैत्र मास – मेला स्थान तिथि विशेष तथ्य बादशाह मेला ब्यावर (अजमेर) चैत्र कृष्णा प्रतिपदा – फूलडोल मेला रामद्वारा (शाहपुरा, भीलवाड़ा) चैत्र कृष्णा प्रतिपदा से पंचमी तक रामस्नेही संप्रदाय से संबंधित धनोप माता का मेला धनोप गाँव (भीलवाड़ा) चैत्र कृष्णा एकम् से दशमी तक

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